IPS मंज़िल सैनी: वो ‘लेडी सिंघम’ जिसने किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया
मुख्य बातें (Quick Facts)
- बैच: IPS 2005 (UP कैडर)
- शिक्षा: गोल्ड मेडलिस्ट, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स
- उपनाम: लेडी सिंघम (Lady Singham)
- बड़ी उपलब्धि: गुड़गांव किडनी रैकेट का भंडाफोड़ (2008)
- प्रेरणा: किरण बेदी
पुलिस की वर्दी में अक्सर पुरुषों का दबदबा माना जाता है, लेकिन IPS मंज़िल सैनी (Manzil Saini) ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। अपराधियों के प्रति उनके सख्त रवैये और निडर फैसले लेने की क्षमता ने उन्हें “लेडी सिंघम” का नाम दिया है।
किडनी रैकेट का पर्दाफाश: एक ट्रेनी का साहस
मंज़िल सैनी अपनी सर्विस की शुरुआत में ही सुर्ख़ियों में आ गई थीं। साल 2008 में, जब वे मुरादाबाद में बतौर Trainee ASP तैनात थीं, तब उन्होंने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट (Kidney Racket) का पर्दाफाश किया था।
एक मजदूर की शिकायत पर, जिसकी किडनी चोरी हो गई थी, मंज़िल सैनी ने बिना किसी बड़े आदेश का इंतज़ार किए रातों-रात गुड़गांव (Gurgaon) के एक अस्पताल में छापेमारी की। वहाँ गरीबों की किडनी निकालकर विदेशियों को बेची जा रही थी। एक नई ट्रेनी अफसर द्वारा किए गए इस बड़े खुलासे ने पुलिस महकमे को भी हैरान कर दिया था।
लखनऊ की पहली महिला SSP
मंज़िल सैनी ने एक और इतिहास रचा जब वे उत्तर प्रदेश की राजधानी, नवाबों के शहर लखनऊ की पहली महिला SSP (Senior Superintendent of Police) बनीं।
अपने कार्यकाल के दौरान, वे अपनी सख्त कानून व्यवस्था और जनता के बीच मौजूदगी के लिए जानी गईं। चाहे मुजफ्फरनगर के दंगे हों या लखनऊ का ट्रैफिक, मंज़िल सैनी हमेशा ‘Front Foot’ पर रहकर काम करती हैं।
“जब आप पुलिस में आ जाते हैं, तो अपराधियों से डर नहीं लगता, बल्कि आदत हो जाती है। हमें गर्व होता है कि हम समाज के उस हिस्से को संभाल रहे हैं जिससे बाकी लोग डरते हैं।”
– मंज़िल सैनी (डर और पुलिस पर विचार)
गोल्ड मेडलिस्ट और पारिवारिक जीवन
खाकी वर्दी पहनने से पहले मंज़िल सैनी पढ़ाई में भी अव्वल थीं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ कॉलेज, दिल्ली से पूरी की और वे प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) की गोल्ड मेडलिस्ट (Gold Medalist) रह चुकी हैं।
अक्सर माना जाता है कि शादी के बाद महिलाओं का करियर धीमा पड़ जाता है, लेकिन मंज़िल सैनी ने इस मिथक को तोड़ा। उन्होंने शादी के बाद (After Marriage) UPSC की परीक्षा पास की और IPS बनीं। वे अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने पति और ससुराल वालों को देती हैं जिन्होंने उनकी तैयारी में पूरा साथ दिया।
नारी शक्ति की मिसाल
मंज़िल सैनी किरण बेदी (Kiran Bedi) को अपना आदर्श मानती हैं। उनका मानना है कि महिला अधिकारी होने का एक फायदा यह है कि पीड़ित महिलाएं उनसे ज्यादा आसानी से अपनी बात कह पाती हैं, खासकर घरेलू हिंसा जैसे मामलों में।
मंज़िल सैनी की कहानी हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है—अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
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