Dr. Akshita Gupta Success Story: कुछ कहानियां सिर्फ़ कामयाबी की नहीं होतीं, बल्कि हिम्मत, सब्र और यक़ीन की मिसाल बन जाती हैं। Dr. Akshita Gupta (डॉ. अक्षिता गुप्ता) की कहानी भी ऐसी ही है, जो यह सिखाती है कि अगर इरादे पक्के हों तो हालात कितने ही मुश्किल क्यों न हों, रास्ता निकल ही आता है।
डॉक्टर की ड्यूटी और IAS का सपना
Dr. Akshita Gupta दिन में अस्पताल में मरीज़ों का इलाज करती थीं और रात में अपने उस सपने के पीछे चलती थीं, जिसे पाने के लिए ज़बरदस्त अनुशासन, त्याग और धैर्य चाहिए था। वह सपना था—यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस अफ़सर बनना।





अस्पताल की भागदौड़, मरीज़ों की ज़िम्मेदारी और लंबी शिफ्ट्स के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनके लिए समय सबसे कीमती था, इसलिए वह हर छोटे-से-छोटे लम्हे का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करती थीं। जेब में छोटे नोट्स, किताबों के पन्ने और दिमाग़ में एक ही ख्वाब—UPSC Exam.
MBBS के साथ UPSC की कठिन राह
Dr. Akshita Gupta हरियाणा के पंचकूला की रहने वाली हैं। उन्होंने UPSC की तैयारी उस समय शुरू की, जब वह चंडीगढ़ मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में MBBS कर रही थीं। मेडिकल की पढ़ाई अपने-आप में बेहद कठिन होती है, लेकिन उसी दौरान उन्होंने यह महसूस किया कि वह समाज और सिस्टम को एक अलग नज़रिये से समझना चाहती हैं।
मेडिकल इंटर्नशिप के दौरान अस्पताल में 12 से 14 घंटे की शिफ्ट आम बात थी। कई बार थकान इतनी होती कि शरीर जवाब देने लगता, लेकिन हौसला कभी कम नहीं हुआ। वह दिन में डॉक्टर की ज़िम्मेदारी निभाती थीं और रात में किताबों के साथ जंग लड़ती थीं।
- Smart Study Strategy: अस्पताल में मिलने वाले छोटे-छोटे ब्रेक उनके लिए पढ़ाई का सुनहरा मौक़ा होते थे। कभी कॉरिडोर में खड़े-खड़े, तो कभी कैंटीन में बैठकर वह अपने पॉकेट नोट्स निकाल लेती थीं। वक्त बचाने के लिए उन्होंने छोटे नोट्स बनाए थे, जिन्हें वह हमेशा अपने साथ रखती थीं।
Akshita मानती थीं कि “नौकरी छोड़कर पढ़ाई करना ही एक रास्ता नहीं होता।” उन्होंने मेडिकल की नौकरी छोड़े बिना यूपीएससी की तैयारी की, जो अपने-आप में एक बड़ा चैलेंज था। लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि मुश्किल रास्ते पर चलकर भी मंज़िल हासिल की जा सकती है।
1st Attempt में ही IAS बनने की कामयाबी (AIR 69)
साल 2020 में Dr. Akshita Gupta का सबसे खूबसूरत सपना पूरा हुआ। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास (First Attempt) में यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 69 (AIR 69) हासिल की और आईएएस अधिकारी बन गईं। यह कामयाबी सिर्फ़ उनकी नहीं थी, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए उम्मीद की किरण थी जो नौकरी या पढ़ाई के साथ सिविल सेवा का सपना देखते हैं।
पंजाब कैडर की IAS ऑफिसर के रूप में सेवा
आज Dr. Akshita Gupta पंजाब कैडर की आईएएस अधिकारी के रूप में देश सेवा कर रही हैं। उन्होंने कभी अपने मेडिकल बैकग्राउंड को कमजोरी नहीं माना, बल्कि उसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। यूपीएससी में उन्होंने Medical Science को ही ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना और अपने अनुभव को सही दिशा में इस्तेमाल किया।
मरीज़ों की सेवा करते हुए उन्होंने समाज को बहुत क़रीब से देखा। लोगों की परेशानियाँ, स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियाँ और ज़मीनी हक़ीक़त—इन सबने उन्हें एक बेहतर प्रशासक बनने में मदद की। यही वजह है कि उनकी सोच सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी सच्चाइयों से जुड़ी रही।
निष्कर्ष: Dr. Akshita Gupta की कहानी यह बताती है कि सपने देखने से ज़्यादा ज़रूरी है, उनके पीछे ईमानदारी से मेहनत करना। हालात अगर साथ न भी दें, तब भी यक़ीन और मेहनत इंसान को आगे बढ़ने का हौसला देते हैं।










