क्या आपने कभी सोचा है कि जिस हवाई जहाज में बैठकर आप बादलों की सैर करते हैं, उसके इंजन को टेस्ट करने के लिए ‘मुर्गों’ (Chickens) का इस्तेमाल किया जाता है? जी हाँ, आपने बिल्कुल सही पढ़ा!
यह कोई मज़ाक नहीं, बल्कि एविएशन इंडस्ट्री का एक अजीबोगरीब लेकिन बेहद ज़रूरी सच है। आखिर करोड़ों के इंजन पर ‘चिकन’ दागने की नौबत क्यों आती है? आइए जानते हैं!
🤔 आखिर माजरा क्या है? (The Mystery)
जब प्लेन आसमान में 30,000 फीट की ऊंचाई पर होता है, तो उसका सबसे बड़ा दुश्मन कोई ‘मिसाइल’ नहीं, बल्कि हवा में उड़ने वाले पक्षी होते हैं। अगर एक छोटा सा पक्षी भी इंजन से टकरा जाए (Bird Strike), तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसी खतरे को परखने के लिए यह टेस्ट किया जाता है।
इंजीनियर्स ने एक मशीन बनाई है जिसे “Chicken Gun” कहा जाता है। यह तोप मुर्गों को 400 km/h की रफ़्तार से इंजन की तरफ फायर करती है! 🤯
🛑 क्या मुर्गे ज़िंदा होते हैं? (Dead or Alive?)
दिल थाम कर बैठिए… राहत की बात यह है कि इस टेस्ट में ज़िंदा मुर्गों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। Fact Check ✅
ये मुर्गे पहले से ही मरे हुए (Supermarket Standard) होते हैं। लेकिन वैज्ञानिक इन्हें डिफ्रॉस्ट (Defrost) करके ही फायर करते हैं ताकि वे बिल्कुल एक असली, उड़ते हुए पक्षी की तरह नरम हों। जमा हुआ (Frozen) चिकन पत्थर जैसा हो सकता है और टेस्ट खराब कर सकता है।
नतीजा: आपकी सुरक्षा 🛡️
अगर इंजन इस ‘चिकन हमले’ को झेल लेता है और चलता रहता है, तभी उसे उड़ने का सर्टिफिकेट मिलता है। तो अगली बार उड़ान भरते समय, उन मुर्गों को धन्यवाद ज़रूर कहें!











