क्या UPSC क्रैक करना ही जीवन की सबसे बड़ी जीत है? क्या एक IAS/IPS कभी जिंदगी से हार सकता है?
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति सर का एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने लाखों छात्रों और युवाओं को अंदर तक झकझोर दिया है। इसमें उन्होंने 4 ऐसी सच्ची कहानियां सुनाई हैं, जो साबित करती हैं कि आप करियर में चाहे कितने भी सफल हो जाएं, अगर आपको “संभालना” (Handling Yourself) नहीं आता, तो सब बेकार है।
अगर आप भी तनाव (Stress), ब्रेकअप या असफलता से जूझ रहे हैं, तो ये 2 मिनट निकालकर जरूर पढ़ें।
1. वो दोस्त जो ‘मेंस’ से 2 दिन पहले हार गया
विकास सर बताते हैं कि उनके कॉलेज के दिनों में एक दोस्त था— हंसराज कॉलेज का डिबेटर। पढ़ने में शानदार, हर डिबेट जीतने वाला।
1996 में विकास सर और वो दोस्त दोनों UPSC Mains देने वाले थे। एग्जाम से सिर्फ 2 दिन पहले खबर आई कि उस दोस्त ने सुसाइड कर लिया।
वजह? एक टूटा हुआ रिश्ता और दबाव। सोचिए, जो लड़का दुनिया को तर्कों से हरा देता था, वो अपने मन के एक छोटे से कोने से हार गया।
2. वो ‘लाइब्रेरी वाला’ कपल और दुखद अंत
दूसरी कहानी दिल्ली यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में पढ़ने वाले एक कपल की है। दोनों बहुत होनहार थे, अंतरजातीय विवाह (Inter-caste marriage) किया, दुनिया से लड़े।
लेकिन कुछ साल बाद खबर आई कि पत्नी ने आत्महत्या कर ली। वजह? परिवार का दबाव, समाज का ताना और आपसी झगड़े (Toxic Relationship)। प्यार के लिए दुनिया से तो लड़ लिए, लेकिन एक-दूसरे के साथ जीवन की उलझनों को नहीं सुलझा पाए।
3. “सभी लड़कियां धोखेबाज होती हैं” (The Trap of Generalization)
तीसरी कहानी एक ऐसे सफल सिविल सर्वेंट की है, जिसने आज तक शादी नहीं की।
25 साल की उम्र में उसे एक लड़की ने धोखा दिया। उस एक धोखे को उसने इतना दिल पर लगा लिया कि उसने मान लिया— “दुनिया की सारी लड़कियां धोखेबाज होती हैं।” आज वो 40 पार कर चुके हैं, सफल हैं, रूतबा है, लेकिन जीवन में अकेले हैं। वो अपनी पुरानी कड़वाहट को Let Go (जाने देना) नहीं कर पाए।
विकास सर का सबसे बड़ा सबक: “The Art of Letting Go”
विकास सर कहते हैं कि हम बच्चों को हिस्ट्री, इकोनॉमिक्स और साइंस तो पढ़ाते हैं, लेकिन “इमोशंस को कैसे मैनेज करें” यह कोई नहीं सिखाता।
उन्होंने कई IAS और IPS अफसरों को जानते हुए भी सुसाइड करते देखा है। इसका मतलब साफ है— सफलता खुशी की गारंटी नहीं है।
जीवन का मूल मंत्र (Golden Rule):
“वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा।” — साहिर लुधियानवी
निष्कर्ष: खुद को संभालना सीखें
अगर कोई रिश्ता नहीं चल रहा, कोई एग्जाम पास नहीं हो रहा, या जीवन में कुछ बहुत बुरा हो गया है— तो उसे पकड़ कर मत बैठिए।
हाथ से छूट रही चीजों को छोड़ने में ही भलाई है। जीवन किसी भी नौकरी, किसी भी रिश्ते और किसी भी एग्जाम से बहुत बड़ा है।
खुद को संभालना सीखिए, बाकी सब अपने आप संभल जाएगा।
क्या आप भी किसी तनाव से गुजर रहे हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर रखें और इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें, शायद किसी की जिंदगी बदल जाए।










