सोचिए, आप UPSC इंटरव्यू रूम में बैठे हैं। सामने 60-65 साल के अनुभवी अधिकारी बैठे हैं। वो आपसे एक सवाल पूछते हैं, आपको जवाब नहीं पता। आप क्या करेंगे? तुक्का मारेंगे? या ईमानदारी से मना कर देंगे?
मशहूर इंटरव्यूअर और प्रोफेसर विजेंदर सिंह चौहान कहते हैं, “यही वो पल है जो तय करता है कि आप IAS बनेंगे या घर वापस जाएंगे।”
अगर आप सोचते हैं कि इंटरव्यू सिर्फ ‘ज्ञान’ का टेस्ट है, तो आप गलत हैं। यह टेस्ट आपकी ईमानदारी, आपकी परवरिश और आपके नजरिए का है। जानिए वो 5 बातें जो हर छात्र को पता होनी चाहिए।
“पूरे इंटरव्यू को तबाह करने के लिए केवल एक झूठ काफी है।”
विजेंदर सर कहते हैं कि अगर आपको किसी तथ्यात्मक (Factual) सवाल का जवाब नहीं पता, तो साफ कह दें— “Sorry Sir, मुझे अभी याद नहीं आ रहा।”
लेकिन अगर आपने ‘गैस’ किया और झूठ बोला, तो बोर्ड समझ जाता है कि इस व्यक्ति में Integrity (ईमानदारी) नहीं है। एक बेईमान व्यक्ति को वो कभी जिला नहीं सौंपेंगे।
2. ‘Manspreading’ से बचें: बैठने का तरीका सब बता देता है
अक्सर लड़के इंटरव्यू में पैर फैलाकर (Manspreading) बैठते हैं। यह दिखाता है कि आप दुनिया में ज्यादा जगह घेरना चाहते हैं और दूसरों (खासकर महिलाओं) के स्पेस की इज्जत नहीं करते।
सीख: अपनी जगह उतनी ही लें जितनी जरूरत है। सिकुड़ कर न बैठें, लेकिन फैल कर भी न बैठें। एक अधिकारी की तरह ‘Decency’ के साथ बैठें।
3. भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान कौन है?
यह सवाल बहुत साधारण लगता है, लेकिन यह आपकी संवेदनशीलता (Sensitivity) चेक करता है।
- अगर आप सिर्फ रोहित शर्मा का नाम लेते हैं, तो बोर्ड सोचेगा कि आप महिलाओं को खिलाड़ी मानते ही नहीं।
- सही जवाब है: “सर, पुरुष टीम के कप्तान रोहित शर्मा हैं और महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर हैं।”
एक अधिकारी को समाज के हर वर्ग (महिला, गरीब, अल्पसंख्यक) के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
4. नोट्स छुपाने वाले कभी ‘लीडर’ नहीं बनते
विजेंदर सर का एक दिलचस्प ऑब्जर्वेशन है: जो छात्र अपने नोट्स दोस्तों से छुपाकर पढ़ते हैं, वो इंटरव्यू में अक्सर फेल हो जाते हैं। क्यों?
क्योंकि प्रशासन (Administration) एक टीम वर्क है। अगर आप ज्ञान साझा नहीं कर सकते, तो आप टीम को लीड कैसे करेंगे? ग्रुप स्टडी करने वाले और दूसरों की मदद करने वाले छात्रों में ‘अफसर वाले गुण’ पहले से होते हैं।
निष्कर्ष: इंटरव्यू ज्ञान का नहीं, व्यक्तित्व का है
UPSC यह नहीं देखना चाहता कि आपको कितना रटा हुआ है (वो तो Mains में देख लिया)। वो देखना चाहते हैं कि दबाव में आप कैसे व्यवहार करते हैं।
तो अगली बार जब आप शीशे के सामने खड़े हों, तो खुद से पूछें— “क्या मैं एक ईमानदार और संवेदनशील इंसान हूँ?” जवाब वहीं मिल जाएगा।
🎥 Watch Full Josh Talks Video Hereक्या आपको विजेंद्र सर की ये बातें सही लगीं? अगर हाँ, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है।











