क्या आप जानते हैं कि जिसे हम रोज “घर की मुर्गी दाल बराबर” समझते हैं, उसे आज पूरी दुनिया “Superfood” मान रही है? जी हाँ, आज 10 फरवरी को पूरी दुनिया World Pulses Day (विश्व दलहन दिवस) मना रही है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस दिन को खास तौर पर उन छोटे-छोटे दानों (Pulses) के लिए चुना है, जो न सिर्फ आपकी सेहत बनाते हैं, बल्कि हमारी धरती (Planet) को भी बचा रहे हैं।
आज के इस आर्टिकल में जानिए World Pulses Day 2026 की थीम, इसका इतिहास और क्यों आपको अपनी डाइट में आज ही दाल को शामिल करना चाहिए।
🌍 World Pulses Day 2026 की थीम (Theme)
हर साल इस दिवस की एक खास थीम होती है। 2026 के लिए FAO (Food and Agriculture Organization) ने थीम रखी है: 👉 “Pulses of the World: From Modesty to Excellence” (विश्व की दालें: सादगी से श्रेष्ठता की ओर)
इसका मतलब है कि दालें अब सिर्फ “गरीबों का भोजन” नहीं रही, बल्कि अपनी न्यूट्रिशन पावर की वजह से “एक्सीलेंस” (श्रेष्ठता) का प्रतीक बन गई हैं। इस साल स्पेन (Spain) इस ग्लोबल इवेंट को होस्ट कर रहा है।
🌱 क्यों मनाया जाता है यह दिन? (History & Significance)
साल 2016 को संयुक्त राष्ट्र ने ‘International Year of Pulses’ घोषित किया था। इसकी सफलता को देखते हुए, 2019 से हर साल 10 फरवरी को ‘World Pulses Day’ मनाने का फैसला लिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य है:
- लोगों को दालों के पोषण (Nutrition) के बारे में जागरूक करना।
- सस्टेनेबल फार्मिंग को बढ़ावा देना (दालें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाती हैं)।
💪 दालें क्यों हैं असली ‘Superfood’? (5 बड़े फायदे)
अगर आप जिम जाते हैं या वजन कम करना चाहते हैं, तो दालें आपका बेस्ट फ्रेंड हैं:
- Protein Powerhouse: शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का सबसे सस्ता और अच्छा स्रोत। 100 ग्राम दाल में मीट के बराबर प्रोटीन हो सकता है।
- Heart Health: इसमें फैट कम और फाइबर ज्यादा होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है।
- Diabetes Friendly: दालों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता।
- Soil Ka Doctor: दालें हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में फिक्स करती हैं, जिससे यूरिया जैसे खाद की जरूरत कम पड़ती है। यानी ये धरती के लिए भी अच्छी हैं।
- Climate Hero: दालों को उगने में दूसरी फसलों के मुकाबले बहुत कम पानी लगता है।
🇮🇳 भारत और दालें (Indian Connection)
भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक (Producer) और उपभोक्ता (Consumer) दोनों है। हमारे यहां हर राज्य की अपनी खास दाल है—पंजाब की ‘दाल मखनी’ से लेकर साउथ का ‘सांभर’ और गुजरात की ‘खट्टी-मीठी दाल’। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है।
📝 Conclusion (निष्कर्ष)
तो अगली बार जब आपकी प्लेट में दाल आए, तो उसे साधारण मत समझिएगा। यह वही ‘छोटा पैकेट, बड़ा धमाका’ है जो आपको और हमारी धरती को स्वस्थ रख रहा है।
World Pulses Day 2026 पर संकल्प लें कि जंक फूड कम और प्रोटीन से भरपूर दालें ज्यादा खाएंगे। Happy World Pulses Day!










