


📍 स्थान: पंचामलाई, तमिलनाडु
🎓 परीक्षा: JEE Mains 2024 (73.8%)
🏛️ कॉलेज: NIT Trichy (Mechanical Engg.)
Success Story: कहते हैं कीचड़ में ही कमल खिलता है। यह कहावत तमिलनाडु की रोहिणी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। एक तरफ पेट भरने के लिए खेतों में कड़ी धूप में मजदूरी, और दूसरी तरफ आँखों में इंजीनियर बनने का सपना। इसी जज्बे ने रोहिणी को आज देश के प्रतिष्ठित NIT Trichy तक पहुँचा दिया है।
🌾 दिन में मजदूरी, रात में पढ़ाई
रोहिणी का परिवार तमिलनाडु के पंचामलाई की पहाड़ियों में रहता है। पिता केरल में मजदूरी करते हैं और माँ भी दूसरों के खेतों में काम करती हैं। घर का खर्च चलाने के लिए रोहिणी भी अक्सर खेतों में हाथ बंटाने जाती थीं। लेकिन मिटटी में सने हाथों ने कभी किताबों का साथ नहीं छोड़ा। उन्हें पता था कि इस गरीबी के चक्रव्यूह से निकलने का एकमात्र रास्ता ‘शिक्षा’ है।
🔥 बिना कोचिंग रचा इतिहास
जेईई मेन्स (JEE Mains) जैसी परीक्षा के लिए जहाँ बच्चे लाखों रुपये कोचिंग में खर्च करते हैं, वहीं रोहिणी के पास न महंगे नोट्स थे, न कोई कोचिंग। उनके पास सिर्फ दो चीजें थीं—दृढ़ संकल्प और सरकारी स्कूल के शिक्षकों का साथ।
🏆 रोहिणी की उपलब्धियां:
- ✅ JEE Mains 2024: 73.8% अंक हासिल किए।
- ✅ First Tribal Girl: अपने इलाके से जेईई पास करने वाली पहली आदिवासी छात्रा बनीं।
- ✅ Admission: अब NIT Trichy में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं।
— रोहिणी
🚀 दूसरों के लिए बनीं मिसाल
रोहिणी की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए एक उम्मीद है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। आज वो NIT Trichy की छात्रा हैं। खेत की पगडंडियों से निकलकर इंजीनियरिंग कॉलेज तक का उनका यह सफर बताता है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
इस बेटी के जज्बे को हमारा सलाम! 🫡
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