Teachers Strike: क्या है वो 'काला कानून' जिस पर X (Twitter) पर मचा है भारी बवाल?

#JusticeForTeacher Trending: शिक्षकों के लिए लागू हुए 2 ‘काले कानून’? जानें पूरा सच!

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Twitter Trending: शिक्षकों के लिए लागू हुए कौन से ‘काले कानून’? जानिए #JusticeForTeacher का पूरा सच
X (Twitter) पर क्यों ट्रेंड कर रहा है शिक्षकों का मुद्दा? जानिए ‘काले कानूनों’ का पूरा सच
UP से लेकर दिल्ली तक बवाल: प्रमोशन में TET की अनिवार्यता और UGC के नए नियमों के खिलाफ सड़क पर उतरे शिक्षक
🚨 असली मुद्दा क्या है?
इस समय X (ट्विटर) पर शिक्षा विभाग और सरकार के खिलाफ एक बड़ा ‘डिजिटल आंदोलन’ चल रहा है। यह गुस्सा किसी एक बात का नहीं, बल्कि सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए दो अलग-अलग फैसलों का है, जिन्हें शिक्षक और छात्र संगठन ‘काला कानून’ (Black Law) कह रहे हैं। आइए दोनों मुद्दों को आसान भाषा में समझते हैं।

🛑 मुद्दा 1: यूपी में प्रमोशन के लिए TET अनिवार्य (UP Teachers Protest)

उत्तर प्रदेश में जूनियर और प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों में इस समय भारी आक्रोश है। सरकार ने सेवारत शिक्षकों के प्रमोशन के लिए भी TET (Teacher Eligibility Test) परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है। ‘टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के बैनर तले शिक्षक इस नियम को अपने अधिकारों का हनन मान रहे हैं और इसे तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
शिक्षकों का 4-चरणीय आंदोलन (Protest Schedule)
22 फरवरी 2026 (आज) X (Twitter) पर दोपहर 2 से 4 बजे तक विशाल हैशटैग अभियान (#) और डिजिटल स्ट्राइक की गई।
23 से 25 फरवरी 2026 यूपी के सभी शिक्षक स्कूलों में अपनी बांह पर काली पट्टी (Black Band) बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे और अपना विरोध जताएंगे।
26 फरवरी 2026 सभी जिला मुख्यालयों (जैसे बस्ती, महराजगंज आदि) पर शिक्षकों द्वारा ऐतिहासिक ‘महा धरना’ और प्रदर्शन किया जाएगा।

🛑 मुद्दा 2: UGC 2026 का नया ‘काला कानून’ (Nationwide Protest)

ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे दूसरे बड़े बवाल की वजह है UGC Equity Regulations 2026। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं, लेकिन छात्र और शिक्षक इसे ‘Black Law’ कहकर इसका भारी विरोध कर रहे हैं।
UGC के नियमों को ‘काला कानून’ क्यों कहा जा रहा है?
  • सामान्य वर्ग (General Category) बाहर: नए नियमों के तहत SC, ST और OBC छात्रों की सुरक्षा के लिए ‘इक्विटी कमेटियां’ बनेंगी, लेकिन इसमें जनरल कैटेगरी के छात्रों को शामिल नहीं किया गया है
  • रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन का डर: आलोचकों और शिक्षकों का कहना है कि इसके तहत झूठी शिकायतें (Fake Complaints) दर्ज की जा सकती हैं, जिससे जनरल कैटेगरी के छात्रों और शिक्षकों को फंसाया जा सकता है।
  • देशभर में विरोध: इसके खिलाफ दिल्ली (JNU), मुंबई और ओड़िशा तक के विश्वविद्यालयों में छात्र और शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी इस कानून के खिलाफ याचिका दायर कर दी गई है।
निष्कर्ष (Conclusion): चाहे मामला यूपी के शिक्षकों के प्रमोशन का हो, या फिर विश्वविद्यालयों में UGC के नए नियमों का— देश का एजुकेशन सिस्टम इस समय उबाल पर है। शिक्षक और छात्र दोनों ही सरकार से इन ‘काले कानूनों’ पर दोबारा विचार करने और एक निष्पक्ष व्यवस्था बनाने की मांग कर रहे हैं।
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Rohit Saini

Rohit Saini एक Software Engineer (B.Tech CSE) और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं। पिछले 5 सालों से वे डिजिटल जगत में सक्रिय हैं। उनका लक्ष्य सरल है—देश के छात्रों को समय पर और सटीक जानकारी (Authentic Information) देना। वे अपनी तकनीकी समझ का इस्तेमाल करके यह सुनिश्चित करते हैं कि आप तक पहुँचने वाली हर खबर (जैसे रिजल्ट्स या सरकारी नौकरी) 100% सही हो।

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