पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया (Twitter/X, Facebook) पर #UGC, #UGCRolleback और #ShameOnUGC जैसे हैशटैग जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जारी किए गए नए नियमों (Regulations 2026) ने छात्रों और शिक्षा जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ इसे भेदभाव मिटाने वाला कदम बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र इसे अपने खिलाफ एक “काला कानून” बता रहे हैं।
अगर आप एक कॉलेज स्टूडेंट हैं या शिक्षा जगत से जुड़े हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है।
क्या है UGC का नया नियम? (Promotion of Equity Regulations 2026)
UGC ने हाल ही में “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026” नाम से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों (Higher Education Institutions) में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना है।
नए नियम की मुख्य बातें:
- Equity Squads (इक्विटी स्क्वॉड): हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक ‘एंटी-डिस्क्रिमिनेशन ऑफिसर’ और ‘इक्विटी स्क्वॉड’ बनाना अनिवार्य होगा।
- Equal Opportunity Cell: SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांग छात्रों के लिए एक विशेष सेल (EOC) बनाना होगा।
- सख्त सजा: अगर कोई संस्थान भेदभाव की शिकायत पर कार्रवाई नहीं करता, तो UGC उसका फंड रोक सकता है या मान्यता रद्द कर सकता है।
- शिकायत का अधिकार: छात्र अब सीधे भेदभाव की शिकायत कर सकते हैं, जिस पर तुरंत एक्शन लेना होगा।
क्यों मचा है इतना बवाल? (Why the Controversy?)
हालांकि यह नियम समानता लाने के लिए बनाया गया है, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों को लेकर इंटरनेट पर भारी विरोध हो रहा है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- 1. ‘भेदभाव’ की परिभाषा पर विवाद: आलोचकों का कहना है कि नए नियमों में “जातिगत भेदभाव” की जो परिभाषा दी गई है, वह कथित तौर पर एकतरफा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स का आरोप है कि यह नियम मानकर चलता है कि भेदभाव सिर्फ आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के साथ होता है, और सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र हमेशा “दोषी” होते हैं।
- 2. झूठी शिकायतों का डर (Fear of Fake Complaints): जनरल कैटेगरी के छात्रों और कई बुद्धिजीवियों का मानना है कि ‘इक्विटी स्क्वॉड’ को बहुत ज्यादा पावर दी गई है। उन्हें डर है कि कॉलेज में आपसी रंजिश या पर्सनल दुश्मनी निकालने के लिए इस कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे कुछ अन्य सख्त कानूनों का दुरुपयोग देखने को मिला है।
- 3. जनरल कैटेगरी के लिए सुरक्षा नहीं: विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि अगर कोई जनरल कैटेगरी का छात्र किसी अन्य वर्ग के छात्र द्वारा प्रताड़ित (Harass) होता है, तो उसके लिए इन नियमों में स्पष्ट सुनवाई का प्रावधान नहीं है। इसे सोशल मीडिया पर “Anti-General Category” बताया जा रहा है।
- 4. अधिकारियों के इस्तीफे: खबरों के मुताबिक, इस नियम के विरोध में कुछ जगहों पर प्रशासनिक अधिकारियों या छात्र नेताओं ने इस्तीफे भी दिए हैं, जिससे मामला और गरमा गया है।
सरकार और UGC का क्या कहना है?
विवाद बढ़ता देख शिक्षा मंत्रालय और UGC के अधिकारियों ने स्पष्टीकरण देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि:
- इन नियमों का मकसद किसी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कैंपस में रोहित वेमुला जैसी दुखद घटनाओं को रोकना है।
- यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी छात्र जाति या समुदाय के आधार पर मानसिक प्रताड़ना का शिकार न हो।
- नियमों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है; इनका उद्देश्य ‘समावेशी शिक्षा’ (Inclusive Education) है।
निष्कर्ष: छात्रों पर क्या असर होगा?
यह विवाद अभी थमता नहीं दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिकाएं दायर होने की खबरें हैं।
- कॉलेजों के लिए: उन्हें जल्द से जल्द नई कमेटियां बनानी होंगी, वरना उन पर गाज गिर सकती है।
- छात्रों के लिए: आपको अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सतर्क रहना होगा। कैंपस में किसी भी तरह की टिप्पणी या मजाक अब भारी पड़ सकता है।
UniversityResultZone की राय: भेदभाव रहित समाज बनाना जरूरी है, लेकिन कानून ऐसा होना चाहिए जो हर छात्र को सुरक्षा का अहसास दिलाए—चाहे वह किसी भी वर्ग का हो। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार भारी विरोध के बाद इन नियमों में कोई बदलाव (Amendment) करती है या नहीं।
👉 क्या आपको लगता है कि यह नया नियम सही है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं!












1 thought on “इंटरनेट पर क्यों ट्रेंड कर रहा है #ShameOnUGC #UGCRolleback? क्या सरकार से हो गई है बड़ी गलती?”
Gen ko kuchal na ha ye sajis ha gen students ko na padhene dena unka mansik sosan jayda hoga subside bhi kar sakte ha